लेह (लद्दाख)। विश्व प्रसिद्ध पैंगोंग त्सो (Pangong Tso) झील पर शीतकालीन मौसम का प्रभाव चरम पर है। 14,270 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह भारत-चीन सीमावर्ती झील पूरी तरह से पारदर्शी नीली बर्फ की मोटी चादर में तब्दील हो चुकी है। इस प्राकृतिक अजूबे को देखने के लिए देश-विदेश से रोमांच प्रेमी भारी संख्या में लेह पहुंच रहे हैं।
लेह जिला प्रशासन और लद्दाख पर्यटन विकास प्राधिकरण ने बढ़ते पर्यटन को देखते हुए विस्तृत एडवाइजरी जारी की है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि झील की कमजोर बर्फ पर वाहन चलाना सख्त वर्जित रहेगा। पर्यटकों को केवल चिन्हित सुरक्षित किनारों पर ही पैदल चलने की अनुमति होगी।
ऑक्सीजन और एक्यूट माउंटेन सिकनेस (AMS) से बचाव के निर्देश
स्वास्थ्य विभाग ने परामर्श दिया है कि लेह पहुंचने के बाद कम से कम 48 घंटे का एकलिमेटाइजेशन अनिवार्य है। चांग ला दर्रे (17,590 फीट) को पार करते समय पोर्टेबल ऑक्सीजन कैन और आवश्यक दवाएं साथ रखना अनिवार्य किया गया है। संपर्क ईमेल: lehladakhtimes@gmail.com
